बद्रीनाथ मंदिर


बद्रीनाथ मंदिर उत्तराखंड में अलकनन्दा नदी के तट पर स्थित है. चार धामों में से एक धाम बद्रीनाथ मंदिर है. इस मंदिर का हिन्दू धर्म में बहुत ही महत्व है. बद्रीनाथ मंदिर भगवान विष्णु के लिए समर्पित है. इस मंदिर में विष्णु जी की पूजा बद्रीनारायण के रूप में की जाती है. बद्रीनाथ मंदिर का निर्माण सोलहवीं सदी में गढ़वाली राजा ने किया था. उन्होंने एक मूर्ति इस मंदिर में रख कर उसकी स्थापना की थी. कुछ लोगो का मानना है कि इस मंदिर का निर्माण शंकराचार्य ने किया था.


आपको बता दें कि यह मंदिर भगवान विष्णु का विशाल मंदिर है और पूरा मंदिर प्रकृति की गोद में बसा हुआ है. इस मंदिर को तीन भागों में बांटा गया है - गर्भगृह, दर्शनमण्डप और सभामण्डप. बद्रीनाथ मंदिर के अंदर 15 मूर्तियों को स्थापित किया गया है. इस मंदिर में भगवान विष्णु की एक मीटर ऊँची काले पत्थर की प्रतिमा भी है. बद्रीनाथ मंदिर को धरती का वैकुण्ठ के नाम से भी जाना जाता हैं.

बद्रीनाथ की यात्रा
बद्रीनाथ मंदिर की यात्रा हर साल अप्रैल-मई के महीने में शुरू होती है. यात्रा के समय इस मंदिर के कपाट खोल दिए जाते हैं और श्रद्धालु भगवान विष्णु के दर्शन कर सकते हैं और आशीर्वाद भी ले सकते हैं. बद्रीनाथ की यात्रा नवंबर महीने तक चलती है इस दौरान लोग केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के दर्शन भी करते हैं. दिसंबर महीने में बहुत अधिक ठण्ड हो जाती है जिस वजह से बद्रीनाथ मंदिर के कपाट बंद हो जाती हैं.

मंदिर से जुड़ी अन्य जानकारी
  • ऐसी मान्यता है कि यह मंदिर पहले भगवान शिव का निवास स्थल हुआ करता था लेकिन बाद में भगवान विष्णु ने यह मंदिर शिवजी से मांग लिया था.
  • बद्रीनाथ मंदिर में चने की कच्ची दाल, गिरी का गोला और मिश्री प्रसाद के तौर पर चढ़ाए जाते है.
  • ऐसी मन्यता है कि जो इस मंदिर में पूजा करते हैं वह शंकराचार्य के वंशज होते हैं जिन्हे रावल कहा जाता है. यह जब तक पुजारी रहते हैं तब तक इन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना ज़रूरी होता है.


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