त्रयंबकेश्वर मंदिर से जुड़ी जानकारी

त्रयंबकेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैं। यह मंदिर महाराष्ट्र जिले में है। इस मंदिर में लाखों लोग भगवान् शिव के आशीर्वाद लेने आते हैं। इस मन्दिर को त्रयंबकेश्वर ज्योर्तिलिंग के नाम से भी जाना जाता हैं। इस मंदिर के अंदर एक छोटे से गंढे में तीन छोटे-छोटे लिंग है जो कि ब्रह्मा, विष्णु और शिव देवों के प्रतीक माने जाते हैं। यह मंदिर 12 ज्योर्तिलिंग में से दसवा ज्योर्तिलिंग माना जाता हैं।


त्रयंबकेश्वर मंदिर गोदावरी नदी के किनारे स्थित है। यह मंदिर काले पत्थरों से बनाया गया हैं। इस मंदिर में काल सर्प दोष की शांति की पूजा की जाती हैं। ऐसी मान्यता हैं कि अगर सोमवार के दिन शिवलिंग का अभिषेक किया जाए तो आपकी हर मनोकामना पूरी हो जाती हैं। सोमवार के दिन इस मंदिर में बहुत से श्रद्धालु आते हैं और इस दिन भगवान त्रयंबकेश्वर की पालकी को भी निकला जाता है।

त्रयंबकेश्वर मंदिर बहुत ही पुराना मंदिर हैं। इसका निर्माण नाना साहब पेशवा ने करवाया था। इस मंदिर का काम 1755 में शुरू हो गया था 30 साल बाद जाकर सन 1786 में पूरा हुआ था। ऐसा भी कहा जाता है कि इस मंदिर को बनाने में काफी रकम लग गयी थी लगभग 16 लाख।

त्रयंबकेश्वर मंदिर से जुडी कथा

ऐसा कहा जाता है कि त्रयंबकेश्वर ऋषि गौतम की तपोभूमि थी। ऋषि गौतम को गोहत्या का पाप लगा था। इसी पाप से मुक्ति पाने के लिए ऋषि गौतम ने शिव की तपस्या की थी और गंगा नदी को यहाँ अवतरित करने का वरदान माँगा था। इस वजह से यहाँ गोदावरी नदी का उद्गम हुआ था।

इस नदी के उद्गम के साथ शिव ने त्रयंबकेश्वर मंदिर में रहना स्वीकार कर दिया। शिव के तीन नेत्रों के कारण ही इस मंदिर का नाम त्रयंबकेश्वर मंदिर पड़ा। आज के समय में यह मंदिर एक पवित्र स्थल बन गया हैं। हर सोमवार को यहाँ लाखों श्रद्धालु भगवान शिव का आशीर्वाद लेने आते हैं।  

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