टीपू सुल्तान का इतिहास
टीपू सुल्तान मैसूर का
एक महान शासक
था. टीपू का
जन्म कर्नाटक के
बंगलुरु में 10 नवंबर 1750 में
हुआ था. टीपू
का पूरा नाम
सुल्तान फतेह अली
खान शाहाब था.
उनके माता का
नाम फातिमा फख्र-उन-निसा
और पिता का
नाम हैदर अली
था. उनका धर्म
इस्लाम था. टीपू
को मैसूर के
शेर के रूप
में भी जाना
जाता है.
टीपू सुल्तान के पिता
का निधन 18वीं
शताब्दी में हो
गया था. उसके
बाद टीपू को
राज गद्दी पर
बिठाया गया था.
जब यह बात
अंग्रेजों को पता
चली तो वह
बहुत डर गए
थे. क्युकि टीपू
सुल्तान एक महान
योद्धा था. राजा
बनने के बाद
टीपू ने अपने
साम्रज्य में बहुत
विकास किया. इन्होने
महिलाओं और बच्चों
को बहुत सुरक्षा
प्रदान की थी.
टीपू हिन्दुओं को
बहुत सताता था
इसलिए इसे हिंदू
धर्म के विरोधी
के रूप में
जाने जाते है.
टीपू सुल्तान की तुलना
ओरंगजेब से भी
की गयी थी.
ऐसा कहा जाता
है कि उन्होंने
कई हिन्दुओं को
मुसलमान बनने के
लिए प्रेरित किया
था. इसलिए उन्हें दक्षिण
भारत के औरंगजेब
के नाम से
भी जाना जाता
हैं. टीपू की
तुलना इसलिए औरंगजेब
से होती हैं
क्युकी औरंगजेब भी हिन्दुओं
के खिलाफ था.
उसने भी कई
हिन्दू मंदिर को तुड़वाया
था. इसी वजह
से इन दोनों
को बुरा राजा
कहा जाता हैं.
मैसूर युद्ध
मैसूर में चार
युद्ध हुए थे.
पहला मैसूर युद्ध
टीपू सुल्तान और
अंग्रेज़ों के बिच
हुआ था. इस
युद्ध में टीपू
सुल्तान का साथ
उनके पिता ने
दिया था. यह
युद्ध टीपू सुल्तान
जीता था. दूसरा
मैसूर युद्ध 1780 में
टीपू और अंग्रेज़ों
के बिच हुआ
था. इस युद्ध
में टीपू सुल्तान
के पिता का
निधन हो गया
था. यह युद्ध
टीपू ने अकेले
ही लड़ा था
और यह युद्ध
करीब 4 साल चला
था.
तीसरा युद्ध सन 1790 में
टीपू सुल्तान और
ब्रिटिश साम्राज्य के बीच
हुआ था. इस
युद्ध में फ्रांस
ने टीपू का
साथ दिया था.
सेरिंगपटम की संधि
पर हस्ताक्षर करने
के बाद यह
युद्ध खत्म हो
गया था लेकिन
टीपू को अपने
साम्राज्य का आधा
हिस्सा ब्रिटिश साम्राज्य को
देना पड़ा था.
चौथा युद्ध 1798 में
हुआ था इस
युद्ध में टीपू
सुलतान का निधन
हो गया था.
टीपू की मृत्यु
के बाद सारा
हिस्सा अंग्रेज़ों ने लूट
लिया और टीपू
सुल्तान के सामाज्य
का अंत हो
गया.

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