माँ दुर्गा कवच
हिंदू धर्म में दुर्गा माँ को विशेष महत्व
दिया जाता है. कहते हैं दुर्गा माँ कल्याणकारी हैं और
दुह्तों का नाश करती हैं. माँ
दुर्गा के नौ रूपों की कथाएँ दुनिया भर में आज भी प्रचलित हैं. आज हम आपको माँ दुर्गा कवच के बारे में बताने जा रहे हैं, जोकि बेहद अदभुत है. हकीक़त में यह एक श्लोकों की लड़ी है जिसे मार्कंडेय पुराण से लिया
गया है. माँ दुर्गा कवच एक तरह से श्लोकों और
दुर्गा सप्त्शी के पाठ का हिस्सा है जिसके जाप से भक्तों को स्वयं दुर्गा माँ के
आशीर्वाद की प्राप्ति होती है.
बता दें कि माँ दुर्गा कवच में कुल 47 श्लोक है. इन श्लोकों को सबसे पहले भगवान ब्रह्मा ने ऋषि
मार्कंडेय को सुनाया था. इन श्लोकों में 7 श्लोक फलश्रुति लिखित हैं. ख़ास
बात यह है कि देवी माँ के ये सभी श्लोक भक्तों की रक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं. यह हमे नाकारात्मक चीज़ों के प्रभाव से दूर रखते है और सभी बाधाओं
से मुक्ति दिलाते हैं. माँ दुर्गा कवच में देवी माँ
के अलग अलग रूप की प्रशंसा की गई है जिसे पढ़ कर हम देवी माँ के आशीर्वाद की कामना
करते हैं.
शक्तिशाली मंत्रों के संग्रह माँ दुर्गा कवच
को बुरी आत्माओ से मुक्ति पाने का रास्ता बताया गया है. आचार्य रवि शंकर जी के अनुसार माँ दुर्गा कवच के भिन्न भिन्न नाम
है जोकि मनुष्य शरीर के अंगों पर आधारित हैं. हर नाम में कोई न कोई गुण और कोई न कोई ऊर्जा
निहित होती है और नाम एवं रूप (आकार) में घनिष्ठ संबंध होता है. नवरात्रि के दिनों
में इस कवच का सच्चे मन से जाप काना बेहद शुभ माना जाता है. ऐसी मान्यता है जो भी भक्त इन दिनों में दुर्गा माँ के कवच का
उचारण करता है, माँ उसकी सभी इच्छाएं पूरी कर देती हैं.

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